रेलवे ट्रेन मैनेजरों की मांगें: ऑल इंडिया गार्ड्स काउंसिल ने रेल मंत्रालय से की तत्काल हस्तक्षेप की अपील



बिलासपुर :— ऑल इंडिया गार्ड्स काउंसिल ने ट्रेन मैनेजरों (पूर्व में गार्ड्स) की वर्षों से लंबित शिकायतों को लेकर रेल मंत्रालय से तत्काल और न्यायोचित समाधान की मांग की है। काउंसिल ने कहा कि इन मुद्दों की अनदेखी से कर्मचारियों का मनोबल गिरा है और व्यावसायिक-व्यक्तिगत जीवन प्रभावित हुआ है। बार-बार के प्रतिनिधित्व के बावजूद कोई कार्रवाई न होने पर काउंसिल ने नौ प्रमुख मांगों का उल्लेख करते हुए एक विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया है।

काउंसिल के अनुसार, ये मांगें दशकों पुरानी हैं और रेलवे की दक्षता तथा कर्मचारी कल्याण से जुड़ी हैं। मुख्य मांगों में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) का तत्काल क्रियान्वयन शामिल है। वित्त मंत्रालय द्वारा 3 नवंबर 2025 को 8वें सीपीसी की कार्यसीमा अधिसूचित किए जाने के बाद काउंसिल ने मांग की कि आयोग के लिए उचित कार्यालय स्थान, मंत्रालयिक स्टाफ और सहायक कर्मचारी उपलब्ध कराए जाएं ताकि इसे शीघ्र शुरू किया जा सके।

एक अन्य महत्वपूर्ण मांग “असिस्टेंट गार्ड (सहायक यात्री ट्रेन मैनेजर)” के गैर-मौजूद पद को सभी आधिकारिक रिकॉर्ड से हटाने की है। काउंसिल ने बताया कि 1991 में पार्सल यातायात के लिए एसएलआर लीजिंग योजना शुरू होने और 2006 में ब्रेकवैन में पार्सल स्पेस लीजिंग के बाद यह पद अनावश्यक हो गया। 2012 में रेलवे बोर्ड ने पद समर्पित करने के निर्देश दिए, लेकिन रिकॉर्ड में यह अभी भी मौजूद है, जिससे भ्रम उत्पन्न हो रहा है।

ट्रेन मैनेजरों के वेतन स्तर में सुधार की मांग करते हुए काउंसिल ने कहा कि पिछले 20 वर्षों से गुड्स गार्ड (गुड्स ट्रेन मैनेजर) के प्रवेश स्तर के वेतन में वृद्धि की अपील की जा रही है, लेकिन कोई प्रगति नहीं हुई। उन्होंने 4वें और 5वें सीपीसी के दौरान ऑपरेटिंग विभाग की समान श्रेणियों के साथ बराबरी सुनिश्चित करने की मांग की, जिसमें गुड्स गार्ड के लिए 4600 जीपी, सीनियर गुड्स गार्ड के लिए 4800 जीपी, पैसेंजर ग्रेड के लिए 5400 जीपी और मेल/एक्सप्रेस ग्रेड में आनुपातिक वृद्धि शामिल है। साथ ही, 8वें सीपीसी में आनुपातिक वेतन स्तरों की सिफारिश की अपील की गई।

मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (एमएसीपी) को लागू करने की मांग पर काउंसिल ने जोर दिया कि रेलवे बोर्ड के आदेश आरबीई 101/2009 और आरबीई 25/2011 न्यायिक समीक्षा में अमान्य पाए गए हैं। इसलिए, ट्रेन मैनेजरों के लिए एमएसीपी तुरंत सुनिश्चित किया जाए।

रनिंग अलाउंस में 25 प्रतिशत वृद्धि की मांग को पक्षपातपूर्ण बताते हुए काउंसिल ने कहा कि महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत पहुंचने पर अन्य भत्तों में वृद्धि हुई (आरबीई 26/2024 और पीसी-VII/2024/i/7/5/5, 4 जून 2024), लेकिन रनिंग अलाउंस को इससे वंचित रखा गया। उन्होंने 6वें सीपीसी के दौरान की गई समान वृद्धि (आरबीई 77/2012 और 65/2014) का हवाला देते हुए तत्काल 25 प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग की।

वाहनों की सुरक्षा से जुड़े रेलवे बोर्ड के ज्वाइंट प्रोसीजर ऑर्डर (जेपीओ) को निरस्त करने की अपील में काउंसिल ने 24 जनवरी 2025 के जेपीओ को चुनौती दी, जो 13 नवंबर 2024 के निर्देशों को 72 दिनों में संशोधित करता है। उन्होंने कहा कि यह स्थापित प्रथाओं, सामान्य नियमों और सुरक्षा निर्देशालय की मंजूरी के विरुद्ध है, तथा स्टेशन खंड में हैंड ब्रेक लगाने की जिम्मेदारी पॉइंट्समैन की है, न कि ट्रेन मैनेजर की। काउंसिल ने 13 नवंबर 2024 के जेपीओ को बहाल रखने की मांग की।

ट्रेन मैनेजरों की 28 प्रतिशत रिक्तियों को भरने की मांग पर काउंसिल ने कहा कि इससे कर्मचारियों पर अत्यधिक कार्यभार पड़ रहा है, आवधिक आराम दुर्लभ हो गया है और छुट्टियां मिलना मुश्किल। उन्होंने युद्ध स्तर पर रिक्तियां भरने का आग्रह किया।

पेंशन नियमों में सुधार की मांग में काउंसिल ने 1983 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले (डी.एस. नकरा बनाम भारत संघ) का हवाला दिया, जिसमें पेंशनधारियों के वर्गीकरण को असंवैधानिक बताया गया। उन्होंने केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमों और संचित निधि से पेंशन दायित्वों के सिद्धांतों को रद्द करने की अपील की।

अंत में, रनिंग अलाउंस पर आयकर छूट सीमा को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये करने की मांग की गई। काउंसिल ने कहा कि रनिंग स्टाफ महीने में 26 दिन ड्यूटी करता है, जो राजस्व उत्पन्न करता है, लेकिन टीडीएस से टेक-होम पे कम हो जाता है। उन्होंने 2010, 2012 और 2019 के संशोधनों का उल्लेख करते हुए आयकर अधिनियम की धारा 10(14), नियम 2बीबी में बदलाव की अपील की।

काउंसिल ने रेल मंत्रालय से समयबद्ध समाधान की उम्मीद जताई और कहा कि इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा तथा कार्य वातावरण में सुधार होगा। रेल मंत्रालय की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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