बिलासपुर :— न्यायधानी अब ‘अपराधधानी’ बनती जा रही है। शहर के पॉश इलाके राजकिशोर नगर में कल रात 9 बजे हुई सनसनीखेज डकैती ने न केवल पुलिस के इकबाल को चुनौती दी है, बल्कि आम नागरिकों के मन में दहशत पैदा कर दी है। सरेआम हुई इस वारदात ने चीख-चीख कर गवाही दी है कि शहर में कानून का खौफ खत्म हो चुका है और अपराधियों के हौसले सातवें आसमान पर हैं।
सुस्त पुलिसिंग और नाकाम घेराबंदी
घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सूचना मिलने के बावजूद पुलिस की सक्रियता केवल कागजी खानापूर्ति और ‘साक्ष्य जुटाने’ के नाम पर औपचारिकता तक सीमित रही। जिस समय पुलिस को शहर के चप्पे-चप्पे पर नाकाबंदी कर टीम गठित करनी थी, उस समय सिस्टम प्रक्रियागत उलझनों में फंसा रहा। नतीजा यह हुआ कि अपराधी आसानी से शहर की सीमा लांघ गए और वारदात के कई घंटों बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं।
क्यों बेखौफ हैं अपराधी?
जनता के बीच यह चर्चा आम है कि आखिर ये अपराधी इतने निडर कैसे हो गए? इसके पीछे दो प्रमुख कारण नजर आते हैं:
राजनीतिक संरक्षण: क्या अपराधियों को सत्ता के गलियारों से शह मिल रही है? बिना किसी ऊंचे हाथ के, सरेआम ऐसी वारदात को अंजाम देना मुमकिन नहीं दिखता।
भ्रष्ट तंत्र और जांच का अभाव: थाने पहुंचने वाले पीड़ितों की मदद करने के बजाय, पुलिस उन पर ही सवालों की बौछार कर देती है। रिपोर्ट लिखने के बाद शुरू होने वाला ‘लेन-देन’ का खेल अपराधियों के लिए कवच बन जाता है। जब अपराधी को पता है कि वह पैसे और रसूख के दम पर बरी हो जाएगा, तो वह अपराध करने से क्यों डरेगा?
सिस्टम की खामियां: जनता की गुहार
पुलिस की कार्यशैली आज ‘डिटेक्शन’ (पकड़ने) से ज्यादा ‘प्रोटेक्शन’ (बचाने) की ओर झुकी हुई नजर आती है। नियमतः पुलिस को तत्काल जमीन पर उतरकर पूछताछ और दबिश देनी चाहिए थी, लेकिन यहाँ फाइलों और बयानों में वक्त जाया किया गया।
“जब तक पुलिस अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई कर नजीर पेश नहीं करेगी, तब तक बिलासपुर की गलियां सुरक्षित नहीं होंगी। आज किसी और के घर डकैती हुई है, कल आपकी बारी हो सकती है।”
यह स्पष्ट है कि मौजूदा सिस्टम या तो अक्षम है या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है। बढ़ते नशे और अपराध के इस गठजोड़ को तोड़ने के लिए अब जनता को ही अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। बिना जन-आंदोलन और एकजुटता के, प्रशासन की यह नींद टूटने वाली नहीं है। अगर आज हम चुप रहे, तो आने वाला कल और भी भयावह होगा।

