सिम्स अस्पताल में सर्वाइकल कैंसर पर एकदिवसीय सीएमई कार्यशाला, देशभर से 200 चिकित्सक हुए शामिल     
  
   महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम पर जोर, सिम्स में आधुनिक जांच व उपचार पर हुई विस्तृत चर्चा

बिलासपुर // सिम्स अस्पताल में महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम, समय पर पहचान एवं उपचार को लेकर एक दिवसीय निरंतर चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को सर्वाइकल कैंसर से संबंधित आधुनिक चिकित्सकीय जानकारियों से अवगत कराया गया। कार्यशाला में देशभर से 200 प्रतिभागी शामिल हुए।
कार्यशाला में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा सर्वाइकल कैंसर के कारणों, जोखिम कारकों, प्रारंभिक लक्षणों, जांच की आधुनिक तकनीकों जैसे पैप स्मीयर एवं एचपीवी टेस्ट, साथ ही उपचार की उपलब्ध विधियों पर विस्तार से जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में से एक है, जिसकी समय पर पहचान एवं नियमित जांच के माध्यम से प्रभावी रोकथाम संभव है। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि एचपीवी टीकाकरण, स्वास्थ्य जागरूकता एवं नियमित चिकित्सकीय परामर्श के माध्यम से सर्वाइकल कैंसर के मामलों में कमी लाई जा सकती है। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों के साथ प्रश्नोत्तरी सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें चिकित्सकों ने अपनी जिज्ञासाओं का समाधान विशेषज्ञों से प्राप्त किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. मधूमिता मूर्ति, अधिष्ठाता सिस्स, आर्गनाइजिंग चेयरमैन डॉ. मानू प्रताप सिंह, संचालक प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष पैथोलॉजी सिम्स बिलासपुर व चिकित्सा अधीक्षक सह-स्रयुक्त संचालक, के.एस.एस.डी. एस. जे. जे. शाराकीय सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कोनी आर्गनाईजिंग को-वेयरमैन डॉ. साधना बागड़े एसोसियेट प्रोफेसर व आर्गनाईजिंग रोक्रेटरी डॉ. चित्रांगी पी. बरपाण्डेय एसोसियेट प्रोफेसर पैथोलॉजी विभाग सिम्स बिलासपुर रहे। कार्यक्रम का शुभारम्भ विशिष्ट वक्ता डॉ. सुप्रिता नायक जी.एम.सी. नागपूर द्वारा सर्वाइकल कैंसर के ग्लेन्डुलर लीसन्स  विषय पर जानकारी के साथ किया गया।
कार्यशाला में देशभर से लगभग 200 प्रतिभागी ऑनलाईन शामिल हुये। छत्तीसगढ़ व आसपास राज्यों के प्रतिभागी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. ज्योति पोते. डॉ. पूर्णिमा पाण्डेय सिंह, डॉ. आकृति शर्मा, डॉ. रश्मि नायक, डॉ. मनोज क्षत्री, डॉ. ईशान साहू डॉ. रश्मि साहू, डॉ. नागेन्द्र साहू, डॉ. प्रभाकर प्रधान, डॉ. सौम्य रंजन, डॉ. प्रशांत ठाकूर, डॉ. असीम आनंद मसीह, डॉ. मुकुन्द शर्मा तथा समस्त पी.जी. स्टूडेंट का योगदान रहा।

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