बेमेतरा // रांका और पथर्रा से एथेनाल प्लांट विस्थापन की कार्यवाही के लिए बीस गांव के लोगों की महापंचायत रांका में संपन्न हुई।जहां पथर्रा गांव की तर्ज पर रांका में सत्याग्रह प्रारंभ किए जाने का प्रस्ताव पारित किया गया है।साथ ही ग्राम पंचायत पथर्रा में पंचायत चुनाव के बहिष्कार के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया है।
उल्लेखनीय है कि ग्राम पथर्रा में तीन माह से अधिक समय से शांति पूर्ण धरना प्रदर्शन के बाद प्लांट परीक्षण से उत्पन्न भयानक आवाज से विचलीत होकर ग्रामीणों ने विगत दस दिन से सत्याग्रह आंदोलन प्रारंभ किया है।प्लांट से आने जाने वालों को अपने गांव की इस पीड़ा से अवगत करा कर सहयोग मांगा जिसे सभी ने स्वीकार किया और प्लांट के कार्य बहिष्कार की गुहार को स्वीकार करते हुए बाहर से आए सभी मजदूर कर्मचारी घर वापस चले गए है,जिससे विगत लगभग दस दिनों से पथर्र्रा प्लांट का कार्य बंद है।रांका और पथर्रा दोनों जगह के प्लांट का इस क्षेत्र में शुरू से ही विरोध हो रहा है।विरोध की ताकत को बढ़ाने के लिए रांका और पथर्रा सहित आस पास से प्रभावित होने वाले गांवों का एक संयुक्त मोर्चा तैयार हो चुका है।इस आंदोलन की सबसे बड़ी खासियत इसका सामूहिक नेतृत्व है।ये पूरा आंदोलन किसी एक दो व्यक्ति पर निर्भर नहीं है,बल्कि इस आंदोलन में हर ग्रामीण इसे अपना आंदोलन मानकर सक्रिय भूमिका निभा रहा है,जिसमें महिलाओं की सक्रिय भागीदारी इस आंदोलन की सबसे मजबूत कड़ी है।आज की महापंचायत से पूरे क्षेत्र में प्लांट विस्थापन का जुनून स्पष्ट दिखाई पड़ता है।ग्रामीणों का मानना है कि
ये क्षेत्र ग्रीन लैंड है,और इस प्लांट को दी गई अनुमति में भारी अनियमितता की गई है,आबादी के नजदीक सारे मापदंडों को ताक पर रख कार्य किए गए है।इसके साथ ही चार किलो मीटर की परिधि में चार प्लांट की स्वीकृति से पूरा क्षेत्र बेचैन है।ग्रामीणों का कहना है इन प्लांट की आहट से पूरे क्षेत्र की शांति छीन गई है।तथा इस क्षेत्र से कृषि जो यहां के लोगों में जीवन यापन का प्रमुख स्रोत है,इसके बर्बाद होने का भय सबसे अधिक दिखाई पड़ता है।साथ ही इस क्षेत्र में यहां के लोग प्रदूषण,और पानी दूषित और पेयजल की समस्या की आशंका से भी भारी आशंकित दिखाई पड़ते है।
इसी सब के चलते इस समय ग्रामीण जनता सड़क के किनारे सत्याग्रह का अभियान चलाए हुए हैं। ग्रामीणों ने महापंचायत में रांका कुरूद की सड़क जो छह माह पहले ही बनी है और सुयश बायो फ्यूल्स जिसका कम अभी मात्र प्रतिशत भी नहीं हुआ है जिसकी भारी वाहनों ने इसकी जैसी दुर्दशा कर रखी है उससे भी बेहद गुस्से में दिखाई पड़े और इस पर कार्यवाही करने प्रशासन से मांग रखने का प्रस्ताव पारित किया गया ।तथा सुयश बायो फ्यूल्स द्वारा गांव के बच्चों के खेल मैदान पर कब्जा और इसे जिला प्रशासन द्वारा इस अतिक्रमण को प्लांट को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया।इसके साथ ही
विगत कुछ समय से प्रशासन द्वारा लगातार ग्रामीणों पर झूठे मुकदमे दायर करने की कड़ी निंदा करते हुए हुए,ऐसी तानाशाही कार्यवाही का कड़ाई से विरोध करने का निर्णय लिया गया।जिसको उच्च न्यायालय में चुनौती देने का प्रस्ताव पारित किया गया।
आज की महापंचायत में प्रमुख रूप से रांका, कठिया ,कुरूद, पथर्रा पेंड्री पथर्रा,जेवरा,जिया, आदु,बूढ़ा जोंग,रवेली,जेवरा,बसनी ,करही,
जिया, बहीगा कीरितपूर , तीव्रैया,रवेली सहित बीस से ज्यादा गांव के लोग शामिल हुए।जिसमें प्रमुख रूप से
भारत साहू,खेमाराम साहू,रामप्रसाद निषाद,जितेंद्र यदु,बिरसिंह साहू,शेख शरीफ कुरैशी,राकेश साहू,बलराम निषाद,दीपक यादव,विनय यादव,तीज कली निषाद,चंपा साहू,संतोषी साहू,सरिता निषाद,जितेंद्र साहू,सत्य नारायण साहू,सज्जाद खान,मोहन साहू,दौना यदु,भागवत मारकंडे
हेमनाथ साहू,नरेश निषाद,सहित आस पास के बीस गांव से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

