
– इंजी. लक्ष्मीकुमार गहवई
माँ महामाया धर्मशाला रतनपुर में दिनांक 31 अक्टूबर को रत्नेश्वर कूर्मि सेवा समिति के द्वारा पटेल जयंती पखवाड़ा विचार गोष्ठी का आयोजन छत्तीसगढ़ क्षत्रिय कूर्मि चेतना मंच के बैनरतले किया गया। गोष्ठी के प्रारंभ में सरदार वल्लभ भाई पटेल व माँ महामाया की प्रतिमा की पूजा अतीथियों ने किया। रत्नेश्वर कूर्मि सेवा समिति के पदाधिकारियों ने चेतना मंच के संरक्षक सिद्धेश्वर पाटनवार, प्रांताध्यक्ष इंजी. लक्ष्मीकुमार गहवई, प्रांत कार्यकारिणी सदस्य गेंदराम कश्यप, जिला युवा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अनिल वर्मा, अध्यक्षता कर रहे मनोहर चंदेल का माल्यार्पण करते हुए स्वागत किया। गोष्ठी में उपस्थित सममानीयजनों ने क्रमशः अपने विचार रखे। इसी क्रम में अश्वनी कश्यप ने कहा कि चेतना मंच के द्वारा समाज को एक किया जा रहा है। रोहित कौशिक ने कहा कि हमें गर्व होता है कि हमारे पूर्वज सरदार पटेल थे। रोहिणी बैसवाड़े ने कहा कि समाजिक कार्यों को निरंतर करते रहना चाहिए। साथ ही विविध पर्वों और त्यौहारों को आयोजित होते रहना चाहिए। मानिक लाल कश्यप ने कहा कि हमें अपने फिरकों से उपर उठकर जाति के विकास में आगे आना चाहिए। प्रमोद कश्यप ने पटेल के जीवन पर काव्यपाठ किया। इस अवसर पर जिला युवा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अनिल वर्मा ने कहा कि सरदार पटेल त्याग के मूर्ति थे। यदि उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री के पद का त्याग नहीं किया होता तो, इस देश की तस्वीर अलग होती। विशिष्ठ अतिथि चेतना मंच के संरक्षक सिद्धेश्वर पाटनवार ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में बताया कि सरदार पटेल अखंड भारत के एकीकरण के प्रणेता थे। वे शिक्षा, समाजसेवा, वकालत, प्रशासन और राजनीति के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ थे। हमंे उस रास्ते पर चलना है, जहाँ से हमारा समाज शीर्ष पर पहुँच सके। हम समाज के ऋणि हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मनोहर चंदेल ने कहा कि हमें समाज के लिए हमेशा जागरुक रहना चाहिए। प्रांताध्यक्ष इंजी. लक्ष्मीकुमार गहवई ने मुख्य अतिथि की आसंदी से कहा कि प्रजातंत्र में संगठन ही सर्वोपरी है। शिक्षा, व्यापार, राजनीति को पकड़कर हमारा समाज आगे बढ़ेगा। समाज को एक होकर दबाव समूह की तरह कार्य करना चाहिए। यदि हम नहीं बदले तो समय हमें बदल देगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मनोहर चंदेल ने सामाजिक कार्य को सक्रियतापूर्वक करने की सलाह दी। गोष्ठी में राजेन्द्र वर्मा उपाध्यक्ष जिला शहर, राजू कौशिक, प्रमोद कश्यप, मोहन लाल कश्यप, टीकाराम कश्यप, घासीराम कश्यप, पतिराम कश्यप, सीताराम कश्यप, राजेन्द्र कश्यप, अशोक कुमार कश्यप, भागवत कश्यप, रामसनेही कश्यप, चन्द्रकुमार कश्यप, सुखदेव कश्यप, तुकाराम चंद्राकर मौजूद थे। गोष्ठी का सफल संचालन रामाश्रय कश्यप ने किया।

