बिलासपुर: आदिवासी दिवस पर अखिल भारतीय गोंडवाना गोंड महासभा एवँ समस्त आदिवासी समाज के द्वारा साइंस कॉलेज में कार्यक्रम रखा गया था. इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल थे, इसलिए इस कार्यक्रम की तैयारी जिला और पुलिस प्रशासन के निगरानी में किया गया था. कार्यक्रम में लगे टेंट, बैठने और खाने की व्यवस्था सिस्टमेटिक ढंग से की गई थी, इसको देखकर लग रहा था कि आयोजकों द्वारा कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए खूब मेहनत की है और कार्यक्रम सफल भी रहा.इसके लिए आदिवासी समाज को श्रेय मिलना चाहिए न की कलेक्टर को.

आप लोग सोच रहे होंगे कि जब कार्यक्रम सफलता पूर्वक निपट गया तो श्रेय कलेक्टर को भी मिलना चाहिए,पर हमारी नजर में नहीं मिलना चाहिए; क्योंकि कार्यक्रम आदिवासी समाज के लोगों के कारण अच्छे से निपटा और बारिश के कारण मैदान में हुए कीचड़ ने उनके उत्साह को कम नहीं कर पाया और वे कार्यक्रम को खूब एन्जॉय किए.

जैसे कि आप लोगों भी जानते हैं कि जिला प्रशासन के हेड कलेक्टर होतें हैं और कलेक्टर को इस तरह के कार्यक्रम को अच्छे ढंग से संपन्न करने का अच्छा खासा अनुभव रहता है. चाहे मौसम कैसा भी हो.
अगर अच्छा अनुभव के बाद भी इस तरह के कार्यक्रम में किसी तरह की कोई अव्यवस्था सामने आती है और लोग परेशान होते हैं, तो इसके लिए कार्यक्रम पर निगरानी रखने वाले को ही जिम्मेदार माना जाएगा.
वहीं, खराब यातायात व्यवस्था के कारण मेन रोड में जाम की स्थिति बन गई थी, जिससे लोगों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने में काफी संघर्ष करना पड़ा. वाहन स्टैंड की सही व्यवस्था नहीं होने के कारण ज्यादातर लोगों को मजबूरन मेन रोड के किनारे अपने वाहन

कार्यक्रम को लेकर कलेक्टर सौरभ कुमार और एसएसपी पारुल माथुर कितने गंभीर थे इन तस्वीरों ने उनकी आज पोल खोल दी .
मुख्यमंत्री को ऐसे कार्यक्रमों की समीक्षा करना चाहिए, तभी अधिकारी अच्छे से अच्छा रिजल्ट दे पाएंगे.



