मस्तुरी विधानसभा में कनौजिया सुर्यवंशी समाज से कांग्रेस प्रत्याशी का इंतजार..

बिलासपुर / बिलासपुर की मस्तुरी विधानसभा सीट में अब तक सीधा मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही रहा है। यही कारण है कि इस सीट में अब हुए अब तक के कुल 15 चुनाव में से कांग्रेस ने 10 बार और भाजपा ने 5 बार जीत दर्ज की है। हालांकि बहुजन समाज पार्टी इस सीट से कई बार चुनाव लड़ चुकी है, लेकिन अब तक उसने जीत का स्वाद नहीं चखा है। पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे।
मस्तुरी की सीट में पहले चुनाव साल 1951 में हुआ। इस समय इस सीट से दो विधायक चुने जाते थे। ऐसे में पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के कुलपत सिंह और हाजी मो. मसूद खान ने चुनाव जीता। वहीं 1957 में हुए चुनाव में एक बार फिर से कांग्रेस गणेश राम अनंत और बशीर अहमद मस्तुरी से विधायक चुने गए। 1962 यहां पहली बार एकल विधायक प्रणाली से चुनाव हुए और कांग्रेस के गणेश राम अनंत ने जनसंघ के सखाराम को 982 वोट के अंतर से हराकर दूसरी बार विधानसभा पहुंचे। इसके बाद से लगातार कांग्रेस की अजेय रथ चलता रहा। इस अजेय रथ को साल 1990 के चुनाव में रोकने का काम किया भाजपा के मदन सिंह ने। इस चुनाव में कांग्रेस ने तीन बार के विधायक रहे बंशीलाल की जगह देवचरण सिंह को टिकट दिया। यह चुनाव काफी रोचक रहा और भाजपा के मदन सिंह को केवल 119 वोट के अंतर से जीत मिली।
मस्तुरी विधानसभा में कुल 15 विधानसभा चुनाव हुए हैं। ये 15 चुनाव जीतने वालों में 10 नेताओं के नाम शामिल हैं। इसमें कांग्रेस के बंशीलाल घृतलहरे और भाजपा के डॉ कृष्णमूर्ति बांधी के नाम 3-3 जीत शामिल है। बंशीलाल ने 1977, 1980 और 1985 में लगातार तीन चुनाव जीता था। इसी तरह डॉ बांधी ने साल 2003, 2008 और 2018 का चुनाव जीता। भाजपा के मदन सिंह 1990 और 1998 में चुनाव जीत चुके हैं। कांग्रेस के ही गणेश राम अनंत 1957 और 1962 के चुनाव में जीत दर्ज कर विधायक बनें। इसी तरह कांग्रेस के जी प्रसाद ने 1967 और 1972 का चुनाव जीता।

साल 2018 के चुनाव में कांग्रेस ने तात्कालीन विधायक रहे दिलीप लहरिया को चुनावी मैदान में उतारा। भाजपा ने दो बार के विधायक रहे डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी को टिकट दिया। वहीं बसपा से जयेंद्र सिंह पाटले प्रत्याशी बनाए गए। इस चुनाव में कांग्रेस, भाजपा और बसपा के अलावा 8 और प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे। चुनाव में मस्तुरी विधानसभा से कुल 187022 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। जब परिणाम सामने आए तो भाजपा को 67950 वोट मिले। बसपा के हिस्से 53843 वोट आए। वहीं इस चुनाव में कांग्रेस तीसरे पायदान पर रही और उसे 53620 वोट मिले। इस तरह डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी ने 14107 वोट के अंतर से यह चुनाव जीत लिया।
इस बार 2023 का चुनाव में देखना होगा कि कौन सा पार्टी जीत का सेहरा बांध रहा क्योंकि इस बार चुनावी मैदान में लगभग कांग्रेस से ही पचास आवेदन भरा गया है कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में एक सीट कनौजिया सुर्यवंशी समाज को देने का वादा किया है जिसका इंतजार कनौजिया सुर्यवंशी समाज के भूतपूर्व जिला सभापति, पानी विभाग के अध्यक्ष तथा 45 वर्षों से निस्वार्थ कांग्रेस पार्टी का सेवा दार झगरराम सूर्यवंशी भी भाग्य आजमाते हुए अपनी पारी का इंतजार कर रहे हैं। मस्तुरी विधानसभा में कभी भी सुर्यवंशी समाज को टिकट नहीं दिया गया है और चूंकि यहां इनकी संख्या अधिक भी है इसलिए उन्हें कांग्रेस पार्टी पर भरोसा है कि उन्हें इस बार पार्टी मौका जरूर देगी। उन्होंने कहा कि मस्तुरी विधानसभा में मैंने बहुत काम किया है लगातार सभी चुनाव में मैंने विशेष योगदान दिया है और चुंकि यह आरक्षित है इसलिए कांग्रेस पार्टी इस बार सुर्यवंशी समाज को मौका देते हुए चुनाव मैदान में उतरने का काम करेगी और मस्तुरी विधानसभा में कांग्रेस भारी बहुमत से जीत हासिल करेगी।

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