बेमेतरा // जिला प्रशासन द्वारा आहट बैठक के बाद आंदोलनकारी को निराशा हुई बैठक से वापस होकर आंदोलनकारी धरना स्थल पर अपना धरना जारी रखे हुए हैं। नदी बचाओ आंदोलन के गौतम गंगोपाध्याय ने कहा कि जीवन की कीमत पर कोई भी प्लांट स्वीकार नहीं है। बेमेतरा जिला को जो की कृषि प्रधान जिला है इथेनॉल हब के रूप में प्रचारित करना और रोजगार के सुनहरे ब्रह्मजाल बनाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। यह जिला कृषि प्रधान जिला है जहां हर परिवार कृषि के माध्यम से अपना जीवन यापन कर रहा है और इससे यहां खुशहाली है। यहां किसी भी तरह के प्रदूषण फैलाने वाले प्लांट लगने से कृषि उत्पादन पर और मानव जीवन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा। वीरेंद्र पांडे और गौतम गंगोपाध्याय तथा अजीताभ मिश्रा द्वारा जिले के प्रथम एथेनॉल प्लांट जो की भैंस में स्थापित है का दौरा कर ग्रामीणों से इस प्लांट के संबंध में चर्चा कर जानकारी ली गई ग्रामीणों ने बताया कि विगत 45 दिनों से यह प्लांट बंद है तथा आसपास के नालों की सफाई कार्य की जा रही है इस प्लांट की बदबू से आसपास के गांव वासी बहुत परेशान है। प्लांट बंद बंद करने के पीछे प्रशासन की रणनीति को देखा जा रहा है क्योंकि इथेनॉल प्लांट बैंड आंदोलनकारी विगत पखवाड़े भर से भैंस प्लांट जाकर वस्तु स्थिति का जायजा लेने जिला प्रशासन को ललकार रहे हैं ऐसे में जिला प्रशासन प्लांट को बंद करके यह दिखाना चाह रहा है कि इस प्लांट में कोई प्रदूषण अथवा बदबू नहीं है जिला प्रशासन जिला प्रशासन की रणनीति को वीरेंद्र पांडे और गौतम बैंग उपाध्याय द्वारा अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया गया
उल्लेखनीय है की प्रवीण तिवारी एवं भैंस गांव के आसपास के जनप्रतिनिधि और सरपंच द्वारा विगत दिन सुपारी पीला चावल और नारियल भेंट कर प्लांट से बदहाल होते भैंस गांव के जनजीवन का पर पढ़ने वाले दुष्प्रभाव पर कार्य करने आमंत्रित किया था। इसी के फल स्वरुप जिला प्रशासन द्वारा इस तरीके की रणनीति अपनाई जा रही है ऐसा माना जा रहा है। इस समय आंदोलनकारी जिला प्रशासन और उद्योगपति की हर रणनीति को असफल करके अपने आंदोलन की की ताकत बढ़ने पर जोर दे रहे हैं। इसी के चलते आंदोलन को 1 घंटे पूर्व समाप्त कर आसपास के गांव में महिला किसान और सभी आंदोलनकारी पदयात्रा कर जन जागरण अभियान चला रहे हैं। आने वाले दिनों में इस बार आंदोलनकारी पहले से ज्यादा ताकत के साथ बेमेतरा शहर की ओर कुछ करेंगे और विधायक और जिला प्रशासन का घेराव करेंगे जिसकी दीर्घकालीन रणनीति बनाकर शीघ्र ही घोषणा की जाएगी। 23 दिन बाद भी आंदोलन यथावत जारी है बल्कि आंदोलन का स्वरूप बढ़ रहा है

