सरपंच पर पंचायत राशि के अफरा तफरी बिना रिकॉर्ड व्यावसायिक परिसर को गांव के बाहर के व्यापारी को किराए पर दिया। तहसीलदार ने दुकान किया सील सुरक्षा बहाना कर सातवीं बार जांच को टाल दिया गया। दुकान सील करने से पहले दुकान दार के पास पहुंची सूचना,आधा समान खाली किया

बेमेतरा // ग्राम पंचायत रांका में शासकीय राशि के दुरुपयोग की प्रकाष्ठा पार हो चुकी है।ग्राम पंचायत के दो व्यावसायिक परिसर की दुकान को पिछले साढ़े चार साल से बिना की रिकॉर्ड के गांव के बाहर के व्यवसाई को किराए पर दे रखा है,जिसकी किराए की रकम सीधे सरपंच की जेब में जा रही है।इस पर ग्रामीणों ने कलेक्टर को शिकायत कर कार्यवाही की मांग रखी थी।जिस पर आज नायब तहसील दार बेरला प्रदीप तिवारी द्वारा राजस्व अमले के साथ उक्त दुकान को सील करने की कार्यवाही की गई।दुकान में कपड़े का भंडारण पाया गया,।कार्यवाही के पहले व्यापारी को भनक लगने से सुबह से समान हटाने का कार्य किया गया अधिकारी को देखते है समान हटाने की कार्यवाही दुकान दार ने रोक दी।
उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत रांका की विकास कार्यों और 15वे वित्त में भारी अफरा तफरी की गई है।जो कार्य हुए ही नहीं उसका भी पैसा आहरित कर लिया गया है।सार्वजनिक शौचालय के नाम से 1.40लाख रुपए की राशि आहरित स्वीकृति प्राप्त हुई है उतने ही राशि आहरित कर खर्च कर दी गई है,काम केवल 10प्रतिशत हुआ है।इसी तरह मिन्हाज के घर से इमरान के घर तक गली सीमेंटीकरण के नाम पर राशि आहरित की गई है वहां पर कुछ भी काम ही नहीं हुआ है।पूर्व से हुई सीमेंटीकरण वाली गली में भी मुर्मीकरण दिखाया जा कर राशि आहरित कर ली गई है।15वे वित्त की राशि में भी कोई मानक का पालन नहीं किया गया है, मनमानी रूप से टाइड और अनटाइड फंड का कोई ध्यान नहीं रखा गया है,और व्यक्तिगत खातों को वेंडर बना कर राशि अंतरित की गई है
घोटालों की लंबी फेहरिस्त है।पिछले तीन माह से सीईओ बेरला जांच नहीं करवा पा रहे है।इसके पीछे कही न कही मिलीभगत ही मुख्य कारण है।इसलिए शिकायत कर्ताओं ने जनपद के बजाय जिला स्तर के अधिकारियों से जांच की मांग की थी परन्तु कलेक्टर और जिला सीईओ ने नजर अंदाज कर पुनः जनपद के अधिकारियों को जांच करने लेख किया है,आज जांच के लिए शिकायत कर्ता इस समय जांच अधिकारी की प्रतीक्षा में बैठे है।जांच अधिकारी समाचार लिखे जाने तक नहीं पहुंच पाए हैं।
पंचायत द्वारा एक ही गली को सात से आठ बार सीमेंटीकरण दिखाया गया है और वो भी बिना की स्टीमेट के कार्य दिखाया गया है।विधायक निधि से सीमेंटीकरण के लिए पौने तीन लाख की राशि लगभग छह माह से पंचायत में आ चुकी है अभी तक कार्य प्रारंभ भी नहीं हो पाया है।एक ओर जहां जांच को टाला जा रहा है वही दूसरी ओर पंचायत की बची हुई राशि पर रोक लगाने की बजाय आहरण लिए संरक्षण दे रहे है।इस समय सीइओ बेरला का रवैया आश्चर्य जनक रूप से संदिग्ध है ।जबकि प्रथम दृष्टया पंचायत के कार्य में अनियमितता प्रमाणित दिखाई दे रही है। तीन चार साल से राशि की अफरा तफरी जारी है।दिन भर के इंतजार के बाद अभी अभी एक बार फिर से जांच को स्थगित किया कर दिया गया है।

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