बेमेतरा // बायोटेक फ्यूल्स के प्रबंधन द्वारा ग्राम पथर्र्रा से इस प्लांट की लिए ग्राम सभा की अनापत्ति प्राप्त करने की बात को पथर्रा वासियों ने झूठा करार दिया पथर्रा गांव के लोगों का कहना है ग्राम सभा द्वारा इस प्लांट को किसी प्रकार की अनुमति प्रदान नहीं की गई है बल्कि ग्राम पंचायत द्वारा इस प्लांट के दी गई अनुमति को ग्राम सभा द्वारा निरस्त किया जा चुका है।पंचायती राज में ग्राम सभा ही सर्वोच्च संस्था है जिसके प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी निरस्त नहीं किया जा सकता है।परंतु इसे प्रशासन द्वारा ही पालन नहीं किया जा रहा है ।इस क्षेत्र में प्रस्तावित प्रत्येक इथेनॉल प्लांट लगाने की अनुमति को हर ग्राम सभा जहां भी प्लांट लगाया जानाहै जिसमें ग्राम सभा रांका,कटिया और ग्राम सभा पथर्रा द्वारा निरस्त किया जा चुका है जिसकी शासन द्वारा अवहेलना की जा रही है ।जो की पंचायती राज की विकेंद्रीकरण की कल्पना का सीधा उल्लंघन है। इस समय शासन प्रशासन द्वारा बेमेतरा जिला को इथेनॉल प्लांट हब के रूप में प्रचारित करना इस क्षेत्र के लोगों के जनजीवन के साथ और इनके कृषि रोजगार के साथ खिलवाड़ है ।जब इस क्षेत्र की जनता किसान या कोई भी व्यक्ति प्लांट नहीं चाहता तब शासन प्रशासन द्वारा इस रोकने का कार्य क्यों नहीं किया जा रहा है। विधानसभा चुनाव के पूर्व और सत्ता हासिल करने के लिए प्लांट का विरोध की घोषणा और सत्ता प्राप्ति के बाद भाजपा की प्लांट के पक्ष धर की नीति का इस समय ग्रामीण जमकर विरोध कर रहे हैं विधानसभा चुनाव के समय सत्ता हासिल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा इस क्षेत्र में प्लांट नहीं खुलने की हिमायती थी और इस मुद्दे को जोर शोर से उठा रही थी ।परंतु सत्ता प्राप्त करते ही उसकी रणनीति और भाषा बदल चुके हैं अब वो प्लांट के हित में बात कर रही है जिसे क्षेत्र के लोग जनता के साथ विश्वास घात के रूप में देख रहे है और इस बदले व्यवहार से आश्चर्य चकित है और अपने को ठगा से पा रहे है।आंदोलनकारी इस समय आसपास के गांव के लोगों को जन जागरण अभियान के माध्यम से जन समर्थन प्राप्त कर अपनी ताकत बढ़ाने और इस बदबूदार प्लांट को उखाड़े फेंकने के लिए हर तरह का संघर्ष करने के लिए तैयार दिख रहे हैं। बेमेतरा जिला में इतना लंबा किसान आंदोलन पूरे इतिहास में पहली बार देखा जा रहा है हालांकि इस आंदोलन को तोड़ने के लिए प्रशासन द्वारा आंदोलनकारी के ऊपर झूठा मुकदमा चलाने अनुविभागीय अधिकारी बेमेतरा के न्यायालय द्वारा नोटिस जारी की गई है लेकिन प्रशासन की इस डराने धमकाने रणनीति का आंदोलनकारी पर कोई प्रभाव पढ़ता नहीं दिख रहा है बल्कि प्रशासन के इस तरह की कार्रवाई से आंदोलनकारी और ज्यादा हिम्मत और ताकत से प्लांट को बंद करने के लिए दृढ़ता के साथ खड़े नजर आ रहे हैं ।देखना होगा क्या आंदोलन और एथेनॉल प्लांट का संघर्ष अब कहां जाकर रुकेगा।

