एथेनाल प्लांट की अजब गजब कहानी प्रदर्शनकारियों के आंदोलन के अर्धशतक दिन पूरे हुए पथर्रा प्लांट ने धुवां उगल कर प्रदूषण फैलाने की शुरुआत की

बेमेतरा // एथेनाल को प्रदान की गई अनुमति में अजब गजब की गाथा लिखी गई है।सुयश बायो फ्यूल्स ने 20 जुलाई 2022 को परियोजना के लिए जमीन के रजिस्ट्री कराई है और अनुविभागीय अधिकारी द्वारा जमीन डायवर्सन के लिए 04 जुलाई को प्रकरण दर्ज कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई।जब सुयश बायो फ्यूल के नाम पर भूमि ही नहीं थी तो उसका स्वरूप परिवर्तन कैसे..? इसी तरह 26 अगस्त को अनुविभागीय अधिकारी बेरला ने भूमि व्यापारतन का आदेश जारी करते हुए पर्यावरण संरक्षण मंडल में सुयश बायो फ्यूल्स द्वारा ऑन लाइन आवेदन के हवाले से इस प्लांट को बी 2 श्रेणी का गैर प्रदूषण कारी उद्योग माना है,जबकि सुयश बायो फ्यूल्स ने ऑनलाइन आवेदन दो माह पांच दिन बाद 31 अक्टूबर 2022 की प्रस्तुस किया है।ऐसी अजब गजब की कहानी शायद बेमेतरा जिला में ही संभव है..?उसी तरह जमीन रजिस्ट्री में भी शासन को राजस्व हानि की गई है।प्रस्तावित भूमि को किसी भी रोड से लगा नहीं होने का शपथ पत्र देकर बाजार भाव से कम दर पर विलेख संपादित कर सरकार को राजस्व की क्षति पहुंचाई गई है।इसी तरह उस परियोजना में पर्यावरण मंडल के समक्ष प्रस्तुत शपथ में भी झूठी जानकारी प्रस्तुत करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है।परियोजना में 5.0किलोमीटर की परिधि में प्रस्तावित क्षेत्र की जानकारी मांगी गई थी।जिसमें निकटस्थ आबादी रांका की दूरी 1.0किलोमीटर दर्शाया गया है,जबकि राजस्व निरीक्षक बेरला का प्रतिवेदन जो अनुविभागीय अधिकारी बेरला के आदेश का हिस्सा है उसमें रांका के आबादी की दूरी 400 मीटर उल्लेखित है।इसी तरह निकटस्थ आंगनबाड़ी और प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक शाला का उल्लेख ही नहीं किया गया है जबकि इस परियोजना में सर्वाधिक दुष्प्रभाव इन्हीं नन्हे शिशुओं और स्कूली बच्चो पर पड़ना अवश्यंभावी है।ग्राम रांका की प्राचीनतम पुरातत्व की मंदिर जो परियोजना से पांच सौ मीटर की दूरी पर है उसका कोई उल्लेख न करके जानकारी छुपाने का कार्य किया गया है।जबकि ग्राम पंचायत रांका इसमें दो कदम आगे बढ़ कर बिना किसी दस्तावेज के ही 22 दिसंबर 2021 में जब करोना कल पूरे शबाब पर था तब इस परियोजना के लिए ग्राम पंचायत से प्रस्ताव पास कर दिया।इस पूरी परियोजना मे 5.0मेगावाट का को जनरेट पावर प्लांट का उल्लेख है जिसमें 70000 मीट्रिक टन कोयले का इस्तेमाल किया जाना प्रस्तावित है फिर ये प्लांट को गैर प्रदूषणकारी मानना कहां तक ठीक होगा ..आज का यक्ष प्रश्न है जबकि परियोजना को दी गई अनुमति अनापत्ति में कही कोई उल्लेख ही नहीं किया गया है।

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