लगातार 12 दिन तक दो सूत्रीय मांगों को लेकर छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन की हड़ताल मंत्री रविंद्र चौबे से चर्चा उपरांत स्थगित कर दी गई। इन 12 दिनों में 71 राजस्व शिविर स्थगित हो गए। 1500 राजस्व मामलों की तारीखें बढ़ानी पड़ी और जिला कोर्ट में इतने ही मामलों की तारीखें हड़ताल की वजह से आगे बढ़ानी पड़ी। हड़ताल की वजह से जो चीजें प्रभावित हुई उनसे निपटने प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।
जो मामले निबट सकते थे उनकी तारीख भी बढ़ी
12 दिनों में राजस्व के व जिला कोर्ट के 2 हजार मामलों की सुनवाई अगली तारीखों में खिसक गई है। इनमें सैकड़ों मामले निपट भी जाते। तहसीलदार व नायब तहसीलदार और न्यायिक कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने से सुनवाई प्रभावित हुई।
रजिस्ट्री में हर दिन 1 करोड़ का नुकसान
22 अगस्त से 12 दिन तक चली हड़ताल में पंजीयक आफिस का काम भी पूरी तरह प्रभावित हुआ। यहां हर औसतन 1 करोड़ की रजिस्ट्री होती है। 12 दिनों तक काम बंद होने की वजह से 10 करोड़ की रजिस्ट्री नहीं हो पाई। 10 करोड़ इसलिए क्योंकि तीजा और दूसरे त्योहारों पर सरकारी अवकाश रहा। फेडरेशन की हड़ताल स्थगित होने के बाद भी लोगों को सरकारी दफ्तरों में कामकाज शुरू होने के लिए दो दिनों का और इंतजार करना पड़ेगा।
दूसरे संगठन बोले – बेनतीजा समाप्ति दुखद फेडरेशन ने कहा- कीचड़ उछालना हमारा स्तर नहीं
फेडरेशन की पिछले बारह दिनों से चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल आज शून्य पर वापस हो गई। छग प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी ने बयान जारी कर कहा कि इतने बड़े आंदोलन का शून्य पर वापसी कर्मचारी जगत के लिए दुखद है। फेडरेशन के शीर्ष नेतृत्व कमल वर्मा औैर उनके पदाधिकारी मात्र श्रेय की राजनीति में 5 लाख कर्मचारियों को झाेंक दिए, जिसका दुखद परिणाम सामने आया है।
चूंकि यह आंदोलन दिशाहीन था इसलिए आंदोलन से लिपिकों ने दूरी बना ली थी। फेडरेशन के शीर्ष नेतृत्व को छग के कर्मचारियों औैर आम जनता से सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए। इधर टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि हड़ताल शुरू होने का दिन और आज का दिन, कर्मचारी वहीं खड़े हैं, जहां वे थे। 6 प्रतिशत लंबित डीए के आदेश होने व एचआरए पर शीघ्र निर्णय लेने सहित वित्तीय स्थिति के आधार पर दीपावली तक डीए जारी करने की बात हड़ताल शुरू होने के पूर्व ही मुख्यमंत्री की ओर से की गई थी। छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के महासचिव जीआर चंद्रा ने कहा कि कोई भी हड़ताल आश्वासन पर ही समाप्त होती है।

