ठिठुरती ठंड में भी पहरेदारी कर रहे है पथर्र्रा के ग्रामीण

बेमेतरा // एथेनाल प्लांट के विस्थापन के लिए तीन महीने से आंदोलन पथर्रा के ग्रामीण अब चौबीसों घंटे की पहरेदारी पर उतर आए है।पूस की एक रात के तर्ज पर ठिठुराती ठंड पर पूरी रात अलाव जला कर रखवारी कर रहे हैं।प्लांट परीक्षण से उत्पन्न आवाज़ को 15 दिन सहन करने के बाद लगातार नींद में व्यवधान से त्रस्त होकर पथर्र्रा और बसनी के ग्रामीण सत्याग्रह और असहयोग आंदोलन पर उतर आए हैं।ग्रामीणों के इस प्रयास को आस पास के गांव का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है।प्लांट के परीक्षण मात्र से उत्पन्न आवाज़ और खेतों में फैलता धुवां ग्रामीणों को विचलित किए हुए है।यही कारण है कि 85 दिनों से शांति पूर्ण धरना करके शासन प्रशासन से गुहार लगाकर थक चुके ग्रामीण अब स्वयं सामने आकर मोर्चा संभाल चुके है।गांव वालों की आशंका निराधार भी नहीं है इस क्षेत्र में इसी तरह फैक्ट्री खुलती रही तो कृषि काम पूरी तरह प्रभावित होना तय है।किसानो की ये आशंका निराधार भी नहीं है।सिल्तरा की प्रदूषण का उल्लेख कर हवाला ग्रामीण जनता बार बार उल्लेख करते है।वहां की स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों की आशंका वाजिब प्रतीत होती है।
ग्रामीणों का ये आंदोलन अब विस्तार की ओर अग्रसर हो रहा है,किसानो के मुताबिक बहुत शीघ्र रांका में महापंचायत अगले सप्ताह आयोजित की जाएगी।प्लांट प्रबंधन की ओर रोहित सचदेव भी आंदोलनकारियों से चर्चा के लिए उपस्थित हुए।ग्रामीणों ने उनसे अनुरोध किया के गांव की जिंदगी को इस तरह औद्योगिक प्रदूषण की आग में न झोंके,ग्रामीण महिलाओं ने उनसे कहा कि अपने यहां आकर गांव की शांति भंग कर दी है।कृपा करके ऐसा न करे।प्लांट के विस्थापन के लिए हर तरह से श्रम सहयोग का ग्रामीणों ने प्लांट मालिक को वायदा किया।

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