इथेनॉल प्लांट बंद करने की मांग को लेकर आंदोलन का 27वा दिन इथेनॉल प्लांट को बंद करने की मांग को लेकर ग्राम पथर्र्रा में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन को आज 27 दिन पूरे हो गए। आंदोलन कारियो पर झूठा केस थोपने का सिलसिला शुरू

बिना कोई कारण एस डी एम द्वारा खेमराम साहू और बसंत जोशी को नोटिस जारी कर 25 अक्टूबर को पेशी बुलाई गई।झूठे प्रकरण पर प्रशासन की इस रणनीति का आंदोलन कारी मुंह तोड़ जवाब देंगे

बेमेतरा // आंदोलनकारी ताकत बढ़ाने प्रतिदिन धरना के बाद आसपास के गांव में समर्थन और जन जागरण रैली निकाल रहे है। इसी तारतम्य में कल सरदा में और आज कठिया में जागरण अभियान चलाया गया।
यहां उल्लेख करना आवश्यक होगा कि कठिया में वर्षा बायो फ्यूल्स के नाम से एक और एथेनॉल प्लांट को स्वीकृति प्रदान की गई है।
बायोटेक फ्यूल्स के प्रबंधन द्वारा ग्राम पथर्र्रा से इस प्लांट की लिए ग्राम सभा की अनापत्ति प्राप्त करने की बात को पथर्रा वासियों ने झूठा करार दिया पथर्रा गांव के लोगों का कहना है ग्राम सभा द्वारा इस प्लांट को किसी प्रकार की अनुमति प्रदान नहीं की गई है बल्कि ग्राम पंचायत द्वारा इस प्लांट के दी गई अनुमति को ग्राम सभा द्वारा निरस्त किया जा चुका है।पंचायती राज में ग्राम सभा ही सर्वोच्च संस्था है जिसके प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी निरस्त नहीं किया जा सकता है।परंतु इसे प्रशासन द्वारा ही पालन नहीं किया जा रहा है ।इस क्षेत्र में प्रस्तावित प्रत्येक इथेनॉल प्लांट लगाने की अनुमति को हर ग्राम सभा जहां भी प्लांट लगाया जाना प्रस्तावित है वहां के ग्राम सभा जिसमें रांका,कठिया और पथर्रा शामिल है ग्राम सभा द्वारा निरस्त किया जा चुका है ।जिसको पालन करवाने की बजाय शासन प्रशासन द्वारा अवहेलना की जा रही है ।जो की पंचायती राज की विकेंद्रीकरण की कल्पना का सीधा उल्लंघन है। इस समय शासन प्रशासन द्वारा बेमेतरा जिला को इथेनॉल प्लांट हब के रूप में प्रचारित करना इस क्षेत्र के लोगों के जनजीवन के साथ और इस क्षेत्र के कृषि रोजगार के साथ खिलवाड़ है ।जब इस क्षेत्र की जनता किसान या कोई भी व्यक्ति प्लांट नहीं चाहता तब शासन प्रशासन द्वारा इसे रोकने के बजाय जनता पर थोपने का कार्य क्यों किया जा रहा है…?विधानसभा चुनाव के पूर्व और सत्ता हासिल करने के लिए प्लांट का विरोध की घोषणा और प्लांट के विरोध करने वाली भाजपा सत्ता प्राप्ति के बाद की प्लांट के पक्ष में क्यों खड़ी है..?भाजपा की इस विरोधाभासी दोहरी नीति का इस समय ग्रामीण जमकर विरोध कर रहे हैं विधानसभा चुनाव के समय सत्ता हासिल करने के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा इस क्षेत्र में प्लांट नहीं खुलने की हिमायती थी और इस मुद्दे को जोर शोर से उठा रही थी ।परंतु सत्ता प्राप्त करते ही उसकी रणनीति और भाषा बदल चुकी है।आंदोलनरत किसानो की मांग है कि अब भाजपा प्लांट के लगाने के पक्ष धर कैसे हो गई स्पष्ट किया जाना चाहिए। सत्ता धारी पार्टी की इस नीति को क्षेत्र के किसानो के साथ विश्वास घात के रूप में देख रहे है। आंदोलन करियों ने भाजपा से पूछा है कि इस आंदोलन में निर्दोष किसानो को जेल में डालने की कार्यवाही जिसमें ख़ेमराम साहू और बसंत जोशी पर फसाने के उद्देश्य से3 झूठा मुकदमा दायर किया गया है।प्रशासन का यह कार्य क्या सत्तासीन भाजपा की रणनीति पर उसके कहने से किया गया है…?अपना पक्ष रखे ।विधायक और पार्टी के इस बदले व्यवहार से व्यवहार से आश्चर्य चकित है ।और अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहे है।आंदोलनकारी इस समय आसपास के गांव के लोगों को जन जागरण अभियान के माध्यम से जन समर्थन प्राप्त कर अपनी ताकत बढ़ाने और इस बदबूदार प्लांट को उखाड़े फेंकने के लिए हर तरह का संघर्ष करने के लिए तैयार दिख रहे हैं। बेमेतरा जिला में इतना लंबा किसान आंदोलन पूरे इतिहास में पहली बार देखा जा रहा है हालांकि इस आंदोलन को तोड़ने के लिए प्रशासन द्वारा आंदोलनकारी के ऊपर झूठा मुकदमा चलाने अनुविभागीय अधिकारी बेमेतरा के न्यायालय द्वारा नोटिस जारी की गई है और 25अक्टूबर को जमानतदार के साथ उपस्थित होने कहा गया है। लेकिन प्रशासन की इस डराने धमकाने की रणनीति का आंदोलनकारी पर कोई प्रभाव पढ़ता नहीं दिख रहा है बल्कि प्रशासन के इस तरह की कार्रवाई से आंदोलनकारी और ज्यादा हिम्मत और ताकत से प्लांट को बंद करने के लिए दृढ़ता के साथ खड़े नजर आ रहे हैं ।25 तारीख को सभी किसान इस झूठे मुकदमे के विरोध में जेल भरो आंदोलन करने बेमेतरा पहुंच कर गिरफ्तारी देगें।
आज धरना के बाद किसान कठिया में जन जागरण अभियान चला रहे हैं।

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