नई दिल्ली :— केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने नई दिल्ली में दिल्ली मेट्रो के समर्पित प्रशंसक अनिल मारवाह को सम्मानित किया। मारवाह ने वर्ष 2002 में दिल्ली मेट्रो की शुरुआत के बाद से अब तक प्रत्येक नए उद्घाटित मेट्रो कॉरिडोर के पहले दिन पहली ट्रेन में यात्रा करने की अनूठी परंपरा को लगातार 24 वर्षों तक निभाया है। इस अवसर पर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के प्रबंध निदेशक डॉ. विकास कुमार भी उपस्थित रहे।
मारवाह के समर्पण की सराहना करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि ऐसी प्रेरणादायक कहानियाँ दिल्ली मेट्रो के प्रति नागरिकों के गहरे जुड़ाव को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि मेट्रो प्रणाली शहरी गतिशीलता में परिवर्तन लाने वाला एक प्रभावी समाधान है और भारत में आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास का सशक्त प्रतीक बन चुकी है।
तोखन साहू ने कहा कि भारत में मेट्रो परियोजनाओं की शुरुआत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दूरदर्शी नेतृत्व में हुई, जिसने देश में आधुनिक मेट्रो रेल प्रणालियों की मजबूत नींव रखी। उन्होंने कहा कि उस दूरदर्शी पहल ने शहरी परिवहन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत की और देशभर में मेट्रो नेटवर्क के तेज विस्तार का मार्ग प्रशस्त किया।
भारत में शहरी गतिशीलता के क्षेत्र में हुई प्रगति पर प्रकाश डालते हुए तोखन साहू ने कहा, “पिछले एक दशक में भारत ने मेट्रो नेटवर्क के विस्तार में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज देश के पास विश्व का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क है, जिसमें 1,143 किलोमीटर से अधिक परिचालन में है और लगभग 936 किलोमीटर निर्माणाधीन है। वर्ष 2014 में केवल पाँच शहरों में मेट्रो सेवाएँ उपलब्ध थीं, जबकि आज यह 29 शहरों तक पहुँच चुकी हैं। प्रतिदिन लगभग 1.15 करोड़ यात्री मेट्रो से यात्रा कर रहे हैं, जो जनविश्वास और विकास की एक अद्भुत कहानी है।”
उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और डबल इंजन सरकारों के सहयोग से देशभर में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो रहा है और यह पहले से अधिक स्वच्छ, सुरक्षित, विश्वसनीय और तेज बनता जा रहा है।
इस अवसर पर यह भी रेखांकित किया गया कि भारत में मेट्रो की शुरुआत केवल शहरी परिवहन में बदलाव तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली एक “मूक क्रांति” भी सिद्ध हुई है। मेट्रो ने यात्रियों में अनुशासन और नागरिक चेतना को बढ़ावा दिया है, महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण में योगदान दिया है तथा शिक्षा और रोजगार तक पहुँच को अधिक सुगम बनाया है। इस प्रकार मेट्रो केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि अधिक समावेशी, जुड़ा हुआ और प्रगतिशील शहरी समाज के निर्माण का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है।

