**जांजगीर-चांपा (छत्तीसगढ़):** जिले के बलौदा तहसील से प्रशासन की तानाशाही और बदले की भावना से की गई कार्रवाई का एक गंभीर मामला सामने आया है। एक स्थानीय पत्रकार, अनिल कुमार पटेल ने जिला प्रशासन और नगर पंचायत के अधिकारियों पर उनके उत्पीड़न और रोजी-रोटी छीनने का आरोप लगाते हुए जिला अध्यक्ष (कलेक्टर) से न्याय की गुहार लगाई है।
पीड़ित अनिल कुमार पटेल, जो ‘सैटेलाइट वन्दे भारत न्यूज’ में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं, का आरोप है कि उन्होंने बलौदा विकासखंड के अंतर्गत हो रहे कुछ शासकीय कार्यों में अनियमितताओं और जनप्रतिनिधियों की कमियों को उजागर किया था। उन्होंने वीडियो के माध्यम से इन खामियों की शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों से की थी। आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर स्थानीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें जान से मारने की साजिश रची और पत्रकारिता छोड़ने की धमकी देते हुए जेल में सड़ा देने की बात कही।
शिकायती पत्र के अनुसार, 25 मार्च 2026 को दोपहर लगभग 2:00 बजे, तहसीलदार बलौदा ने बिना किसी पूर्व सूचना या कानूनी नोटिस के, नगर पालिका की जेसीबी ले जाकर पत्रकार की दुकान और उनके पत्रकारिता कार्यालय को तोड़ दिया।
पीड़ित का कहना है कि दुकान में रखे रिपेयरिंग के सामान जिनकी कीमत लगभग ₹30,000 थी, उन्हें नगर पालिका द्वारा जब्त कर लिया गया।
अनिल पटेल का कहना है कि उन्हें ‘बाहरी आदमी’ बताकर बार-बार निशाना बनाया जा रहा है, जबकि वह पिछले 10 वर्षों से वहीं रहकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं।
पत्रकार ने इस पूरी कार्रवाई को तहसीलदार बलौदा की व्यक्तिगत रंजिश बताया है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ,राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा और पुलिस अधीक्षक को भी प्रेषित की है।
पीड़ित की मांग:
1. दोषी तहसीलदार और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
2. पत्रकार को उसी स्थान पर पुनः दुकान संचालित करने की अनुमति दी जाए।
3. जब्त किया गया सामान और औजार वापस दिलाए जाएं।
> “मैं एक गरीब व्यक्ति हूँ और यह दुकान ही मेरी आजीविका का एकमात्र साधन थी। सच दिखाने की सजा मुझे इस तरह दी जा रही है कि आज मैं बेरोजगार हो गया हूँ।”
> अनिल कुमार पटेल (पीड़ित पत्रकार)
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या संज्ञान लेता है और क्या एक चौथे स्तंभ के प्रहरी को न्याय मिल पाता है।

