एथेनाल प्लांट के ध्वनि प्रदूषण से भन्नाए ग्रामीणों ने चौबीसों घंटे कर रहे है पहरेदारी

बेमेतरा // एथेनाल प्लांट के विस्थापन के लिए 85 दिन से शांति पूर्ण धरना दे रहे ग्रामीण विगत रात्रि के भयानक ध्वनि प्रदूषण से आक्रोशित होकर पहरेदारी पर निकल आए हैं। पथर्रा और बसनी के ग्रामीण पिछले लगभग 15 दिनों से प्लांट परीक्षण से निकलने वाली तेज आवाज से रात में नींद की समस्या की शिकायत कर रहे थे,ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट परीक्षण से पहाड़ का पत्थर पीसने की तरह से ध्वनि निकलती है जिससे रात की नींद में व्यवधान होता है,नींद से अचानक चमक कर उठने की शिकायत सामने आ रही है।कल रात जब इसी तरह की घटना दोहराई गई तो पथर्र्रा और बसनी के ग्रामीण सड़क पर उतर आए।यहां आने जाने वालों से असहयोग आंदोलन करने लगे।महिलाएं कल से सरपंच के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन चला रही है,और सभी से प्लांट की ओर जाने वाले रस्ते के प्रयोग नहीं करने की गुजारिश कर रही है।ऐसा ही काम बसनी के लोग भी कर रहे है।इन सब में महिलाएं बहुत ज्यादा आक्रोशित दिखाई दे रही है।ग्रामीणों का कहना है कि गांवों के भीतर इस तरह प्लांट स्थापना उचित नहीं है,विगत दिन कृषि विभाग की एक टीम भी प्रशासन के निर्देश पर इस प्लांट से कृषि पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव का मुआयना करने आई थी।उनकी भी स्पष्ट राय है कि इस कृषि पर विपरीत प्रभाव पड़ना अवश्यंभावी है,उनके द्वारा ग्रामीण किसानो के बीच प्लांट के दुष्प्रभाव का पंचनामा भी तैयार किया गया है।इस प्लांट को दी गई अनुमति में घोर अनियमितता बरती गई है,जिसके सत्यापित दस्तावेज यहां के ग्रामीण शासन ,प्रशासन तक लगातार पहुंचाते रहे और लगातार इस पर कार्यवाही की मांग करते रहे है,इस प्लांट के लिए डायवर्सन की प्रक्रिया के दिन से ही विरोध हो रहा,इतने विरोध के बाद भी प्लांट को चलाने की जिद समझ से परे है।इस बीच प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को डराने धमकाने के लिए एफ आई आर भी दर्ज किया गया है।कल रात ठिठुरती ठंड में भी ग्रामीण अलाव जला कर बारी बारी से रखवारी कर रहे हैं।मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीणों के विरोध के चलते यहां बाहर से आए कर्मचारी रात में प्लांट छोड़ कर भाग खड़े हुए हैं।जिला प्रशासन भी इस प्लांट को दी गई अनुमति चार सप्ताह में जांच करने की बात कह कर फंस चुकी है क्योंकि अनियमितता के सारे दस्तावेज उन्हें उपलब्ध कार्य जा चुका,जिसमें प्रथम दृष्टया ही अनियमितता दीखाई दे जा रही है,और चार सप्ताह की जगह पर आठ सप्ताह से ज्यादा का समय व्यतीत ही चुका है,ऐसे में कार्यवाही करने के अलावा कोई और उपाय प्रशासन के पास बचा नहीं है।जिससे प्रशासन बचने की कोशिश कर रहा है।84 दिन से भी ज्यादा समय तक लगातार शांति पूर्ण आंदोलन के बाद प्लांट से होने वाला ध्वनि प्रदूषण के कारण ग्रामीण सड़क पर निकालने बाध्य हुए है।जबकि पंचायत द्वारा ग्रामीण पगडंडी को औद्योगिक सड़क की तरह इस्तेमाल नहीं करने के लिए प्रस्ताव पारित कर सूचना बोर्ड भी लगाया गया था,जिसका फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा लगातार उल्लंघन किया गया है।गत दिन भारी वाहन प्रवेश रोकने बाढ़ भी लगाया गया था,जिसे फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा तोड़ कर फेक दिया गया ,जिससे ग्रामीणों की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है,वही पुलिस और प्रशासन का रवैया ग्रामीणों को प्लांट प्रबंधन का पक्षधर और पक्षपाती प्रतीत होता है,जिससे ग्रामीण लोग और ज्यादा गुस्से में दिखाई दे रहे है।प्रशासन फैक्ट्री प्रबंधन की हर बात पर संज्ञान लेता है,जबकि ग्रामीणों की जायज़ बात को भी नजर अंदाज कर दे रहा है ।यही कारण है कि इस समय पूरा गांव चौबीसों घंटे पहरेदारी पर उतर आया है,और इस प्लांट के विस्थापन से कम पर मानने को तैयार नहीं है।ग्राम और नगर निवेश के मुताबिक पथर्रा सहित पूरा क्षेत्र ग्रीन बेल्ट में आता है,।निवेश क्षेत्र में नहीं है।आज पहरेदारी करने वालों में प्रमुख रूप से उषा शर्म सरपंच,रामहीन साहू,दुर्गा यदु,मंजू,कोशाले,गायत्री जोगी,उर्वशी साहू,चित्ररेखा साहू, मीना साहू,कुमारी निषाद ,चित्ररेखा निषाद,सुशीला लहरे,प्रभा साहू,
तीज कली निषाद सहित पूरा गांव की महिलाएं उपस्थित है

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