बिलासपुर नगर निगम की गार्डन और कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना के चलते लिंगियाडीह बस्ती के 113 परिवारों के घरों पर बुलडोजर का संकट मंडरा रहा है। पिछले 12 दिनों से चल रहे सर्वदलीय धरना-आंदोलन में सैकड़ों महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग रोज सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक डटे हुए हैं।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि दशकों से इन परिवारों से नियमित रूप से संपत्ति कर, पानी कर सहित सभी कर वसूले जा रहे हैं। पहले राजीव आवास योजना के तहत पट्टे भी दिए गए थे और जोन-7 ने 10 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से प्रीमियम लेकर रसीदें भी जारी की थीं। इसके बावजूद अब इन्हें अतिक्रमण बताकर बेदखल करने की तैयारी है, जो सरासर अन्याय है।
नौ महीने पहले ही अपोलो अस्पताल के सामने रामनगर, श्यामनगर और चिंगराजपारा में सड़क-नाली के नाम पर सैकड़ों मकान-दुकानें जमींदोज की जा चुकी हैं।
बुधवार को साहू समाज ने भारी संख्या में धरना स्थल पहुंचकर एकजुटता दिखाई। मुकुंद साहू, राजकुमार साहू, भोलाराम साहू समेत समाज की महिलाएं-बुजुर्ग भी धरने में शामिल हुए।
विपक्षी दलों ने साफ कहा है – जब तक उचित पुनर्वास नहीं होगा, एक भी घर नहीं टूटने दिया जाएगा। आंदोलन को सभी वर्गों, सामाजिक संगठनों और दलों का खुला समर्थन मिल रहा है। अब तो आस-पास के क्षेत्र मोपका, चिल्हांटी, चिंगराजपारा, बहतराई, खमतराई, बिरकोना, मंगला में भी निगम द्वारा तोड़-फोड़ किये जाने की चर्चा है और ये भी इस धरना प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे और अपना समर्थन देंगे ऐसी जानकारी मिल रही है।
कांग्रेस सहित विपक्षी नेताओं ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है कि “भाजपा की छत्तीसगढ़ सरकार गरीबों की झोपड़ियां तोड़कर अमीरों के लिए गार्डन और मॉल बनाने में जुटी है। जो लोग दशकों से टैक्स दे रहे हैं, उन्हें रातोंरात बेघर करने की यह नीति जनविरोधी और अमानवीय है।” विपक्ष का कहना है कि पहले से घोषित पुनर्वास नीति को ठेंगा दिखाकर जिस तरह बस्तियां उजाड़ी जा रही हैं, उससे साफ है कि सरकार गरीब-विरोधी चेहरा लिए हुए है।
बस्तीवासियों का सवाल एक ही है – “जब हमारा सबकुछ वैध था, टैक्स दे रहे थे, तो अब अचानक अवैध कैसे हो गए?”

