बिलासपुर :— जिला अस्पताल बिलासपुर में इन दिनों ओपीडी (OPD) पर्ची कटवाने के नाम पर लिया जा रहा 10 रुपये का शुल्क आम और गरीब मरीजों के लिए बड़ी जी का जंजाल बन चुका है। अस्पताल में इलाज कराने पहुंच रहे मरीजों को न सिर्फ घंटों लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है, बल्कि महज 10 रुपये के खुले (चिल्हर) पैसे न होने के कारण उन्हें काउंटर से वापस लौटा दिया जाता है। इसके बाद मरीजों को दोबारा लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनकी परेशानी दोगुनी हो गई है।
जागरूक नागरिकों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को इस महज 10 रुपये के शुल्क से कितना राजस्व का फायदा हो रहा है, यह समझ से परे है। शासन-प्रशासन को इस अव्यवहारिक नियम को तत्काल बदलना चाहिए ताकि दूर-दराज से आने वाले गरीब मरीजों को इस 10 रुपये की समस्या और मानसिक प्रताड़ना से निजात मिल सके।
अस्पताल प्रबंधन की इस मनमानी और संवेदनहीनता का एक बड़ा उदाहरण हाल ही में देखने को मिला। जिला अस्पताल के ओपीडी काउंटर पर बैठे एक कर्मचारी का रवैया इस कदर अड़ियल और कठोर था कि जब वहां एक पत्रकार ने अपना और स्टाफ का परिचय दिया, तब भी वह 10 रुपये की मांग पर अड़ा रहा। पैसे न होने की स्थिति में कर्मचारी ने नियमानुसार ‘जीरो पर्ची’ (निःशुल्क पर्ची) देने से साफ तौर पर इनकार कर दिया।
काउंटर पर तैनात इस कर्मचारी के दुर्व्यवहार और अड़ियल रवैये को कैमरे में कैद कर जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को वीडियो सहित भेजकर अवगत कराया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब यह कर्मचारी पत्रकार और परिचय देने वालों के साथ ऐसा व्यवहार कर सकता है, तो निश्चित रूप से यह रोज न जाने कितने सीधे-साधे और गरीब मरीजों को परेशान करता होगा।
अब देखना यह है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ और सीएमएचओ साहब उक्त अड़ियल कर्मचारी के खिलाफ क्या सख्त कार्रवाई करते हैं, ताकि भविष्य में किसी अन्य मरीज को इस तरह की प्रताड़ना का सामना न करना पड़े।


