सक्ती :— जिला पंचायत सक्ती के स्थानांतरण आदेशों की धज्जियां उड़ाने और शासकीय नियमों को सरेआम दरकिनार करने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत नवापाराखुर्द के पूर्व सचिव नितेश कुमार गबेल का स्थानांतरण हुए 25 दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अपनी हठधर्मिता के चलते वे कुर्सी छोड़ने और प्रभार सौंपने को तैयार नहीं हैं। इस मामले में सरपंच द्वारा कलेक्टर जनदर्शन, जिला पंचायत और जनपद पंचायत में पहले भी कई बार लिखित आवेदन देकर गुहार लगाई जा चुकी है, परंतु इसके बावजूद पूर्व सचिव के अड़ियल रवैये में कोई सुधार नहीं आया है।
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिला पंचायत सक्ती के आदेश क्रमांक 3140 दिनांक 03.06.2026 के तहत पूर्व सचिव नितेश कुमार गबेल का स्थानांतरण अन्यत्र किया गया था। उनके स्थान पर नवपदस्थ सचिव कृष्ण कुमार सिदार ने तत्काल ग्राम पंचायत में अपनी उपस्थिति दे दी थी। पूर्व सचिव द्वारा प्रभार देने में टालमटोल किए जाने पर थक-हारकर ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती रामेश्वरी बाई गोंड ने कलेक्टर जनदर्शन सहित जिला पंचायत सीईओ और जनपद पंचायत के दफ्तरों के चक्कर काटे और पहले भी लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायतों के बाद जनपद पंचायत सक्ती ने सख्त रुख अपनाते हुए दिनांक 24.06.2026 को कारण बताओ सूचना पत्र (क्रमांक 809/स्था./ज.प./2025) जारी कर 03 दिवस के भीतर प्रभार सौंपने का अंतिम अल्टीमेटम दिया था। अत्यंत खेद का विषय है कि इस नोटिस की म्याद खत्म होने के बाद भी पूर्व सचिव ने शासकीय आदेशों को ठेंगा दिखा दिया है और वे प्रभार सूची के साथ उपस्थित नहीं हुए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, नवपदस्थ सचिव कृष्ण कुमार सिदार कई बार प्रभार लेने की उम्मीद में ग्राम पंचायत नवापाराखुर्द आ चुके हैं, लेकिन वहां पूर्व सचिव की तरफ से कोई भी सकारात्मक प्रतिक्रिया या सहयोग नहीं मिल रहा है। नए सचिव ने अपनी उपस्थिति तो दर्ज करा दी है, परंतु पूर्व सचिव द्वारा प्रभार न सौंपने और सहयोग न करने के कारण अभी तक नए सचिव का स्पेसिमेन डीएससी (Digital Signature Certificate) और सीएसआर (CSR) पोर्टल में आईडी-पासवर्ड अपडेट/मैप नहीं हो पाया है।
तकनीकी प्रकियाएं पूरी न होने और पंचायत की कोई भी शासकीय सामग्री (दस्तावेज, पंजी, नगद राशि या परिसंपत्ति) हस्तांतरित नहीं किए जाने के कारण नए सचिव चाहकर भी पंचायत का कोई कार्य नहीं कर पा रहे हैं। इस वजह से नवपदस्थ सचिव को अत्यधिक मानसिक व व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस गंभीर स्थिति की पूरी लिखित जानकारी नए सचिव द्वारा संबंधित अधिकारियों को भी समय पर दे दी गई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब तक मूकदर्शक बने हुए हैं।
पूर्व सचिव के इस तानाशाही रवैये का सीधा खामियाजा नवापाराखुर्द की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। डिजिटल सिग्नेचर (DSC) ब्लॉक होने और पंचायत का प्रभार न मिलने के कारण 15वें वित्त आयोग के सारे ऑनलाइन भुगतान पूरी तरह ठप हैं, जिससे गांव के विकास कार्य बंद पड़े हैं। इसके साथ ही ग्रामीणों के जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, पेंशन और अन्य अति-आवश्यक नागरिक अधिकार पूरी तरह अवरुद्ध हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन के इतने चक्कर काटने के बाद भी एक कर्मचारी की मनमानी के आगे पूरा सिस्टम बेबस नजर आ रहा है। यह कृत्य सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा आचरण नियम 1998 का खुला उल्लंघन है।
पहले भी कई बार विभिन्न स्तरों पर आवेदन देने के बाद अब सरपंच श्रीमती रामेश्वरी बाई गोंड एवं नवपदस्थ सचिव कृष्ण कुमार सिदार ने जिला व जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) को पुनः अल्टीमेटम सौंपते हुए मोर्चा खोल दिया है। सरपंच ने साफ शब्दों में मांग की है कि यदि पूर्व सचिव नितेश कुमार गबेल के विरुद्ध तत्काल कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई और छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम के अंतर्गत ‘एकतरफा प्रभार’ देने का अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ, तो ग्रामीण जनहित में उग्र आंदोलन और चक्काजाम करने को बाध्य होंगे


