बिलासपुर :— छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर और बढ़ते बिजली बिलों के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी ने साय सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को बिलासपुर स्थित कांग्रेस भवन में जिला कांग्रेस कमेटी के सभी ब्लॉक पदाधिकारियों और सदस्यों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा व रणनीति बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने एकजुट होकर सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा और प्रदेशव्यापी जन आंदोलन खड़ा करने का ऐलान किया।
बैठक में भिलाई विधायक देवेंद्र यादव, बिलासपुर शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा, कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव, ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री, पूर्व महापौर रामशरण यादव, पूर्व जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अध्यक्ष प्रमोद नायक और पूर्व ग्रामीण अध्यक्ष विजय केसरवानी समेत बड़ी संख्या में वरिष्ठ नेता व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान नेताओं ने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए कि बूथ स्तर से लेकर ब्लॉक और जिला स्तर तक के सभी पदाधिकारी व कार्यकर्ता घर-घर संपर्क अभियान चलाएंगे। इस अभियान के तहत आम जनता से उनके पुराने और स्मार्ट मीटर लगने के बाद के बिजली बिलों का अंतर पूछा जाएगा और लोगों को जागरूक किया जाएगा।
नेताओं ने विशेष तौर पर कहा कि कार्यकर्ता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं और पदाधिकारियों के घर भी सबसे पहले जाएं और संपर्क साधें, क्योंकि स्मार्ट मीटर और महंगे बिजली बिल की मार से वे भी उतने ही त्रस्त हैं जितना कि आम जनता।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए भिलाई विधायक देवेंद्र यादव ने प्रदेश सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ देश का वह राज्य है जहां सबसे ज्यादा बिजली का उत्पादन होता है और यहां से दूसरे राज्यों को बिजली सप्लाई की जाती है। लेकिन यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि यहीं की जनता को सबसे महंगी बिजली का भुगतान करना पड़ रहा है।”
देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर लागू करना एक सोची-समझी साजिश है। इसके जरिए आम जनता पर जबरन भारी-भरकम बिल थोपे जा रहे हैं ताकि परेशान होकर लोग सोलर पैनल खरीदने पर मजबूर हों। यह पूरा खेल किसी खास उद्योगपति को फायदा पहुंचाने के लिए रचा जा रहा है, जिसे कांग्रेस पार्टी किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देगी।
कांग्रेस नेताओं ने हुंकार भरते हुए कहा कि पहले चरण में जनता को जागरूक किया जाएगा, जिसके बाद एक विशाल जनसमूह को साथ लेकर राज्य सरकार के खिलाफ एक ऐतिहासिक और बड़ा जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा। कांग्रेस भवन में हुई इस बैठक से साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में स्मार्ट मीटर का मुद्दा छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बड़ा मोड़ ले सकता है।

