बिलासपुर/मस्तूरी :— मानव जीवन में सेवा और त्याग की भावना सबसे बड़ी मानवता मानी जाती है। इसी भावना को चरितार्थ करते हुए ग्राम पंचायत जांजी, विकासखंड मस्तूरी, जिला बिलासपुर निवासी जय सिंह ठाकुर ने एक अनुकरणीय एवं प्रेरणादायी पहल करते हुए मृत्यु उपरांत अपना शरीर चिकित्सा शिक्षा एवं अध्ययन-अध्यापन के लिए दान करने का संकल्प लिया है।
जय सिंह ठाकुर ने छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान, बिलासपुर के शरीर रचना विभाग में निर्धारित प्रक्रिया के तहत मृत्यु उपरांत शरीर दान घोषणा-पत्र प्रस्तुत किया है। उनके इस निर्णय का उद्देश्य मृत्यु के बाद भी मानव शरीर को चिकित्सा शिक्षा और भावी चिकित्सकों के अध्ययन के काम में लाना है।
जय सिंह ठाकुर सामाजिक एवं संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहने वाले व्यक्ति हैं। वे अपने क्षेत्र में ईमानदार, कर्मठ और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान रखते हैं। उन्होंने अपने जीवन में समाज के लिए कार्य करने के साथ-साथ मृत्यु के बाद भी समाज के काम आने का जो निर्णय लिया है, वह निश्चित रूप से दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत है।
उनका मानना है कि देहदान केवल शरीर का दान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के बेहतर स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के लिए दिया गया अमूल्य योगदान है। मेडिकल विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना का व्यावहारिक अध्ययन करने में ऐसे देहदान का महत्वपूर्ण योगदान होता है।
जय सिंह ठाकुर के इस निर्णय से ग्राम जांजी सहित मस्तूरी क्षेत्र में देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। उनका यह कदम समाज को यह संदेश देता है कि मनुष्य अपने जीवन के बाद भी मानवता की सेवा कर सकता है।
“जीवनभर समाज की सेवा और मृत्यु के बाद भी मानवता के काम आने का संकल्प”—जय सिंह ठाकुर का देहदान का निर्णय समाज के लिए एक प्रेरणादायी मिसाल है।
ग्राम जांजी के लोगों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जय सिंह ठाकुर के इस पुनीत निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि उनके इस कदम से समाज में मानव सेवा, त्याग और देहदान के प्रति जागरूकता को नई दिशा मिलेगी।

