बिलासपुर (छत्तीसगढ़): — गरीबों और बेघर लोगों को छत मुहैया कराने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ (PMAY) स्थानीय प्रशासनिक अनदेखी और अनियमितताओं की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। ताजा मामला बिलासपुर के राजकिशोर नगर स्थित तुलसी आवास क्षेत्र का है, जहां नियमों को ताक पर रखकर दो-दो आवास योजना एक ही परिवार को आवंटित कर दिए गए।
तुलसी आवास के क्वार्टर नंबर 3/51 और 3/52 को लेकर गंभीर अनियमितता सामने आई है। योजना के नियमों के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ प्रति परिवार केवल एक ही इकाई (यूनिट) के रूप में दिया जा सकता है, और दो अलग-अलग आवासों को आपस में जोड़कर या एक करके इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। लेकिन यहां न केवल एक ही परिवार के नाम पर दो-दो आवास आवंटित कर दिए गए, बल्कि दोनों क्वार्टरों को आपस में जोड़कर बड़ा मकान तैयार कर लिया गया है और न ही नियमानुसार प्रधानमंत्री आवास योजना का बोर्ड लगा हुआ है।
लाखों रुपये की सरकारी राशि खर्च करके बनाए गए ये दोनों आवास बनने के बाद से ही खाली पड़े हैं। लंबे समय से किसी के न रहने के कारण देखरेख के अभाव में यह संपत्ति अब खंडहर में तब्दील हो रही है जिससे सरकारी संसाधनों का सरेआम दुरुपयोग हो रहा है।जांच में स्पष्ट हो सकता है कि इन्हें आवास की जरूरत ही नहीं थी।
एक तरफ जहां शहर में सैकड़ों जरूरतमंद, गरीब और भूमिहीन परिवार आज भी कड़कड़ाती धूप, बारिश और ठंड के बीच सड़कों या कच्ची झोपड़ियों में दिन काटने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी तरफ संपन्न या रसूखदार लोगों को फर्जीवाड़े के जरिए दो-दो मकान बांट दिए गए।
यह मामला केवल तुलसी आवास के दो क्वार्टरों तक सीमित नहीं लगता। आशंका जताई जा रही है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो ऐसे कई अन्य आवास सामने आएंगे जो गलत तरीके से बांटे गए हैं और आज खाली पड़े सड़ रहे हैं।
स्थानीय लोगों की मांग
स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने जिला प्रशासन तथा नगर निगम के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि:
1. राजकिशोर नगर स्थित तुलसी आवास के आवंटन की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
2.नियम विरुद्ध तरीके से आवासों को जोड़ने और दोहरे आवंटन के दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
3.खाली और अवैध रूप से कब्जा किए गए आवासों को निरस्त कर वास्तव में हकदार गरीब परिवारों को तुरंत आवंटित किया जाए।

