कोंडागांव/माकड़ी :— शासन-प्रशासन द्वारा बाल मजदूरी रोकने के लिए लगातार जागरूकता अभियान और नियम-कानून बनाए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर इसकी तस्वीर बेहद चिंताजनक नजर आ रही है। माकड़ी के मेन गांधी चौक के पास, थाने से महज करीब 200 मीटर की दूरी पर स्थित मार्केट क्षेत्र में दिनदहाड़े तीन नाबालिग बच्चों से निर्माण कार्य कराया जा रहा था। आरोप है कि संबंधित राजमिस्त्री/ठेकेदार द्वारा बच्चों से ढलाई जैसे जोखिमपूर्ण कार्य में मजदूरी कराई जा रही थी।
सबसे गंभीर बात यह है कि यह स्थान किसी सुनसान इलाके में नहीं, बल्कि मुख्य मार्ग और व्यस्त बाजार क्षेत्र में है। इसके पास ही जिला सहकारी बैंक स्थित है, जहां दिनभर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रहती है। वहीं जनपद कार्यालय भी नजदीक होने के कारण पूरे दिन पंचायत प्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का आना-जाना लगा रहता है। इसके बावजूद कथित रूप से बाल मजदूरी का यह मामला खुलेआम चलता रहा।
स्कूल की उम्र के बच्चों से जोखिमपूर्ण काम
प्रत्यक्ष रूप से देखने पर बच्चे करीब 12-13 वर्ष की उम्र के प्रतीत हो रहे थे। बताया जा रहा है कि एक बच्चा स्कूल ड्रेस में भी नजर आया। यदि बच्चों की उम्र वास्तव में इतनी कम है तो मामला और भी गंभीर हो जाता है, क्योंकि उनसे निर्माण कार्य जैसे जोखिमपूर्ण काम कराना न केवल उनके शिक्षा के अधिकार को प्रभावित करता है, बल्कि उनकी सुरक्षा और भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है।
निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। बच्चों सहित काम कर रहे मजदूरों में हेलमेट अथवा आवश्यक व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) दिखाई नहीं दिए। ढलाई और निर्माण कार्य में थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।
हालिया हादसों के बावजूद नहीं लिया जा रहा सबक
क्षेत्र में निर्माण कार्य के दौरान हो चुके हादसे इस पूरे मामले की गंभीरता को और बढ़ाते हैं। हाल ही में फरसगांव में भवन निर्माण कार्य के दौरान एक मजदूर की हादसे में मौत होने की घटना सामने आई थी। इसी प्रकार कोंडागांव में पुट्टी का काम कर रहे एक मिस्त्री के सिर में गंभीर चोट लगने के बाद मृत्यु होने की घटना भी सामने आ चुकी है।
इन घटनाओं के बाद भी यदि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी जारी रहती है और नाबालिग बच्चों को जोखिमपूर्ण निर्माण कार्य में लगाया जाता है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई करेगा या उससे पहले ही रोकथाम के लिए कदम उठाए जाएंगे?
कुछ पैसों के लिए बच्चों के भविष्य से खिलवाड़?
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहा है कि आखिर निर्माण कार्य कराने वाले ठेकेदार या राजमिस्त्री बच्चों को मजदूरी के लिए क्यों लगा रहे हैं। क्या उन्हें बाल श्रम कानून की जानकारी नहीं है, या फिर जानकारी होने के बावजूद मजदूरी बचाने के लिए बच्चों से काम कराया जा रहा है?
यदि कोई नियोजक, ठेकेदार या जिम्मेदार व्यक्ति जानबूझकर कम उम्र के बच्चों से काम कराता है, तो यह केवल मजदूरी कराने का मामला नहीं है, बल्कि बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। स्थानीय संगठन और जिम्मेदार नागरिकों का कहना है कि बाल मजदूरी को किसी भी स्थिति में सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
सूचना देने के बाद भी कार्रवाई का सवाल
स्थानीय लोगों के अनुसार बाल मजदूरी की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाने का प्रयास किए जाने पर कई बार टोल-फ्री नंबर पर शिकायत करने की बात कही जाती है, जबकि कुछ अधिकारियों से संपर्क करना भी मुश्किल होता है। यदि किसी स्थान पर खुलेआम नाबालिग बच्चों से जोखिमपूर्ण काम कराया जा रहा हो, तो शिकायत मिलने के बाद तत्काल मौके पर पहुंचकर सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई की व्यवस्था होनी चाहिए।
सिर्फ शिकायत को एक नंबर से दूसरे नंबर पर भेज देना पर्याप्त नहीं है। बाल मजदूरी जैसे संवेदनशील मामलों में त्वरित हस्तक्षेप जरूरी है, ताकि किसी बच्चे के साथ दुर्घटना होने से पहले उसे सुरक्षित किया जा सके।
हादसे के बाद शोक नहीं, हादसे से पहले कार्रवाई चाहिए
सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशासनिक अमला किसी हादसे के बाद घटनास्थल पर पहुंचकर जांच, बयान और कार्रवाई करे, या उससे पहले ही जोखिमपूर्ण परिस्थितियों को रोकने की जिम्मेदारी निभाए?
यदि माकड़ी के मुख्य बाजार में, पुलिस थाने के नजदीक और प्रशासनिक कार्यालयों की आवाजाही वाले क्षेत्र में नाबालिग बच्चों से निर्माण कार्य कराया जा रहा है, तो यह व्यवस्था की निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।
बच्चे मजदूरी के लिए नहीं, शिक्षा और सुरक्षित भविष्य के लिए हैं। प्रशासन को चाहिए कि माकड़ी सहित पूरे क्षेत्र में निर्माण स्थलों का तत्काल निरीक्षण कर बाल मजदूरी की जांच करे, बच्चों की उम्र का सत्यापन करे, संबंधित नियोजक/ठेकेदार की जिम्मेदारी तय करे और सुरक्षा मानकों की भी जांच की जाए।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि बाल मजदूरी कौन करवा रहा था?
सवाल यह भी है कि इतने व्यस्त और सार्वजनिक स्थान पर यह सब होते हुए जिम्मेदार तंत्र की नजर क्यों नहीं पड़ी?
आखिर किसी हादसे का इंतजार क्यों? जवाबदार कौन?

