सक्ती (छत्तीसगढ़) :— छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर में ‘ऑटो पंचिंग’ प्रणाली लागू होने और आगामी समय में इसे प्रीपेड (रिचार्ज) प्रणाली में बदलने की योजना के विरोध में विद्युत मीटर रीडर श्रमिक संघ, छत्तीसगढ़ ने चिंता व्यक्त की है। संघ ने जिला कलेक्टर (सक्ती) को ज्ञापन सौंपकर प्रदेश के लगभग 5,000 मीटर रीडरों की आजीविका और भविष्य की सुरक्षा के लिए राज्य शासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
संघ द्वारा सौंपे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि स्मार्ट मीटरों में ऑटो पंचिंग शुरू हो चुकी है और जल्द ही प्रीपेड रिचार्ज व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इस व्यवस्था के लागू होते ही मैनुअल बिलिंग और मीटर रीडिंग का कार्य पूरी तरह समाप्त हो जाएगा, जिससे प्रदेशभर में कार्यरत लगभग 5,000 मीटर रीडर और उनके परिवार सीधे तौर पर आजीविका के संकट से घिर जाएंगे।
संगठन के अनुसार, सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI), 2005 के तहत ऊर्जा विभाग और छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड से मीटर रीडरों के वैकल्पिक रोजगार और सेवा-निरंतरता को लेकर जानकारी मांगी गई थी।
प्राप्त जवाब में विभाग ने स्पष्ट किया है कि उनके पास इस संबंध में कोई स्पष्ट दस्तावेज, नीति या आदेश उपलब्ध नहीं है । संघ ने इसे अत्यंत चिंताजनक बताते हुए कहा कि एक तरफ नई प्रणाली लागू की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ कार्यरत श्रमिकों के संरक्षण या पुनर्वसन के लिए सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है।
ज्ञापन में भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सम्मानपूर्वक जीवन-यापन और आजीविका का अधिकार प्रत्येक नागरिक का मूल अधिकार है। बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के हजारों श्रमिकों को बेरोजगारी की ओर धकेलना सामाजिक और मानवीय दृष्टि से गंभीर विषय है।
विद्युत मीटर रीडर श्रमिक संघ ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि वे इस संवेदनशील मामले का संज्ञान लें और संबंधित विभागों की बैठक आयोजित कर राज्य शासन एवं ऊर्जा विभाग को आवश्यक अनुशंसा भेजें, ताकि हजारों मीटर रीडरों का भविष्य सुरक्षित हो सके।


